एक सफ़र दोस्ती से प्यार तक(Love story hindi, Teenage Love)

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प्यार दोस्तों प्यार एक बीमारी की तरह जो बस हो जाती है तो बस जाने का नाम ही नहीं लेती, आज हम भी एक ऐसे ही प्यार के बारें में जानेंगे "एक सफ़र दोस्ती से प्यार तक(Love story hindi, Teenage Love)" |

एक सफ़र दोस्ती से प्यार तक(Love story hindi, Teenage Love)

और प्यार तो हर जगह है इसी तरह ही दो दोस्तों के बीच भी प्यार होता है
और ये प्यार बहुत अनोखा भी होता ये रिश्ता ही कुछ अलग होता जिसमे थोड़ी  खटाश और थोड़ी मिठास भी होती है। वो कहते है न की एक लड़का लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते।


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हमारी आज की ये कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिसमे दो बचपन के दोस्त है और उनके बिच बेहद प्यार भी है पर ये बात वो खुद नहीं जानते तो चलो अब देखते है की उनको अपने प्यार का एहसास कैसे होता है


आज की हमारी ये कहानी मुंबई में रहने वाले दो बेहद जिगरी दोस्त आदित्य  और पंखुड़ी की है।


आदित्य और पंखुड़ी बचपन से एक दिल दो जान थे दोनों के घर एक ही जगह थे और जैसे आदित्य और पंखुड़ी दोस्त थे उनके परिवार वाले भी एक दुषरे के बेहद करीब थे।  वो दोनों बचपन से हमेशा एक साथ रहते थे
और  एक ही स्कूल में भी थे  साथ स्कूल   जाया करते थे और साथ ही घर आया करते थे।


आदित्य और पंखुड़ी हर कदम  पे एक दुशरे का साथ और दोनों एक दुशरे की केयर भी करते थे  हलाकि वो
एक दुषरे से अलग  नहीं रह सकते थे।


पर जैसा की हम जानते है की हर रिश्ते में जहा प्यार होता है वही तकरार भी होता भी होता है।
ऐसा ही आदित्य और पंखुड़ी का   रिश्ता था।


ऐसे  तो दोनों में बहुत प्यार था पर एक  दिन दोनों के बिच एक छोटी सी नोक झोक हो जाती है
दोनों एक दुशरे से बात करना बंद कर दिया।


अगली सुबह आदित्य अकेला स्कूल के लिए  निकल जाता और ये बात पंखुड़ी को  ये बात   बिलकुल अच्छी नहीं लगती  क्युकी पंखुड़ी  ने सोचा था की आदित्य उसको मानाने आएगा पर  ऐसा हुआ नहीं।


उस दिन दोनों ने बिलकुल बात नहीं की एक दुषरे से फिर रात को पंखुड़ी आदित्य के घर जाती है और बोलती है


पंखुड़ी= क्या है तुझे इतना भाऊ क्यों खा रहा है (गुस्से में )


आदित्य= हाँ तो जब तू भाऊ खा सकती है तो मैं क्यों नहीं।


पंखुड़ी= अच्छा मेने क्या किया तुझे बता।


आदित्य= कुछ नहीं तू कुछ करती ही कहा है।


पंखुड़ी= aawwh अच्छा जी चल अब मर मत माफ़ करदे।


आदित्य= जा माफ़ किया खुश रह।


और इसी तरह दोनों के बीच ऐसी छोटी मोती नोक झोक होती रहती थी और इससे उन दोनों का रिश्ता और मजबूत ही होता था।


इसी तरह धीरे धीरे समय निकलता गया आदित्य और पंखुड़ी अब बच्चे से  बड़े हो गए और स्कूल से निकल के
कॉलेज में पहुंच चुके थे।


पंखुड़ी ने आर्ट्स क्लास में एडमिशन ले लिया और आदित्य ने भी बी.कॉम में अपना एडमिशन करवा लिया।
दोनों की दोस्ती अभी भी बिलकुल बचपन की तरह थी पर दोनों के बिच में अब तक प्यार का कोई एहसास नहीं
हुआ था।


अभी भी आदित्य और पंखुड़ी सारा समय एक दुषरे के साथ ही बिताते थे।
एक दिन दोनों साथ कॉलेज जाते समय पंखुड़ी ने आदित्य से. बोला।

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पंखुड़ी= आदित्य सुन।


आदित्य = हाँ बोल.


पंखुड़ी=  एक खुशखबरी है मैं ना अमेरिका जारी हु अपनी आर्ट्स की पढाई पूरी करने।


आदित्य= (उदाश होते हुए ) पर क्यों यार।


पंखुड़ी= अरे अपना कॅरिअर बनाने।


आदित्य= अरे यार मतलब तू मुझे छोड़ के जाएगी मैं इम्पोर्टेन्ट नहीं हु क्या।


पंखुड़ी= अरे पागल है पर कॅरिअर भी तो इम्पोर्टेन्ट है।


पंखुड़ी की बाते सुन के  आदित्य बहुत उदाश हो जाता है वो सोचने लगता है अब पंखुड़ी उससे छोर्ड कर अमेरिका चली जाएगी और उससे भूल जाएगी।
तभी पंखुड़ी का फ़ोन आता वो आदित्य को एक पार्टी में चलने के लिए इन्वाइट करती  है पहले तो आदित्य माना कर देता है फिर पंखुड़ी के मानाने के बाद आदित्य मान जाता है और दोनों पार्टी में चले जाते है।


पंखुड़ी आदित्य को  परेशान करते हुए बोलती पार्टी  में मेरे क्लास की बहुत सूंदर  लड़किया आएगी तेरी बात करवा दूंगी।
आदित्य  बोलता है मुझे नहीं करनी बात किसी से।
अब दोनों पार्टी में पहुंच जाते है फिर दोनों इंजॉय करते है आदित्य थोड़ी सी ड्रिंक कर लेता है बेथ जाता है
पंखुड़ी डांस करने चली जाती है।


कुछ देर बाद पंखुड़ी की एक दोस्त उसके पास आती है जिसका नाम रुषाली होता और वो पंखुड़ी से आदित्य के बारे में पूछती है।

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रुषाली= यार वो लड़का कौन है।
पंखुड़ी= कौन वो आदित्य है तुझे मिलना है उससे।
रुषाली =  हाँ मिलवा ना कितना स्वीट लग रहा है।


पंखुड़ी रुषाली को आदित्य के पास ले  जाती और रुषाली को आदित्य से मिलवाती है
और दोनों को एकेले में बात करने के लिए चोर्ड कर चली जाती है।


अब आदित्य और रुषाली एक दुषरे से बात करने लगते है


अब आदित्य पंखुड़ी को छोड़ कर रुषाली के साथ ज्यादा समय बिताने लगता है
इस बात का एहसास अब पंखुड़ी को होता है और ये पहली बार होता है  जब पंखुड़ी को आदित्य के लिए प्यार का एहसास होता है।
और पंखुड़ी को रुषाली से जलन होने  लगती है पंखुड़ी अब आदित्य से झगड़ा करने लगती है


पंखुड़ी= तू समझता क्या है अपने आप को।


आदित्य= क्या हुआ तुझे।


पंखुड़ी= तेरे लिए तो वो रुषाली ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है ना अब।


आदित्य= अरे क्या है यार वो मेरी दोस्त है बस जैसी तू है।


पंखुड़ी= बस रेनदे तू सब दीखता है जैसे तू रुषाली को देखता है ना।


आदित्य= यार क्या है पागल बच्चो की तहरा क्यों कर रही है.


पंखुड़ी = हाँ हु पागल मुझे नहीं पता तू उसको ऐसे नहीं देखेगा बस।


आदित्य= देखूगा  क्या करेगी तू जाना अमेरिका (मुझे छोड़ के )


पंखुड़ी= नहीं तू  बस मेरा है I Love You.


इतना बोल के पंखुड़ी वहा से चली जाती है पंखुड़ी के वहा से जाने के बाद आदित्य  को भी एहसास होता है की उसके दिल में भी पंखुड़ी के लिए प्यार है।
आदित्य अगले दिन पंखुड़ी के घर जाता है तो पंखुड़ी उदाश होक बैठी होती है आदित्य पंखुड़ी  के पास जाके बैठ जाता है और पंखुड़ी का हाथ अपने हाथ में ले के बोलता है।



आदित्य= I Love You Tooo

पंखुड़ी बस आदित्य को देखती रहती है।


आदित्य= मै तेरा इंतज़ार करुगा तू जितना चाहे उतना समय लेले।


तो इस तरह से बचपन के दो दोस्तों को एक दुषरे के लिए प्यार का एहसास हुआ कुछ समय बाद पंखुड़ी अमेरिका से वापस आ गयी और दोनों ने शादी करली और दोनों एक साथ ज़िन्दगी बिताने लगे।


उम्मीद करता हु आपको हमरी आज की ये प्यारी सी कहानी "एक सफ़र दोस्ती से प्यार तक(Love story hindi, Teenage Love)" पसंद आयी होगी। ..
आपको यहाँ ऐसी ही प्यारी कहानियां पढ़ने को मिलेगी फिर मिलते है एक प्यारी सी कहानी के साथ।

धन्यवाद।

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