gehu ki kheti(गेहूँ की खेती)

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गेहूँ रबी की फसल है इसकी बुवाई अक्टूबर से लेकर दिसंबर महीने तक होती है और कटाई फरवरी से लेकर मई महीने तक की जाती है| गेहूँ की फसल(gehu ki kheti) की लगभग अवधि 120 से 150 दिनों की होती है|




इधर के कुछ सालों में गेहूँ की पैदावार में बढ़त हुए है इसका मुख्य कारण वैज्ञानिक तरीके से खेती है| वैज्ञानिक तरीके से खेती करने से भूमि की उर्वरा शक्ति की बरक़रार रहती है और फसल की अच्छी पैदावार भी होती है| आज यहा पर हम लोग गेहूँ की वैज्ञानिक खेती के बारे में अच्छे से जानेंगे और ये भी जानेंगे की गेहूँ की उचित पैदावार के लिए किस तरीके से खेती किया जाये इसीलिए ये आपके लिए बहुत हि जरुरी है तो आप इसे अंत तक पढ़े|

बिज

गेहूँ की अच्छी उपज के लिए जरुरी है कि उन्नत किस्म के बीजों का चुनाव किया जाये,बिज में दवा अवश्य मिला लें, क्युकि कम से कम 85 से  90 प्रतिशत बीजों का उगना जरुरी है नही तो आपकी उपज पर प्रभाव पड़ेगा|

खेत की तैयारी

गेंहूँ की फसल से पहले अगर खेत में धान या गन्ने की फसल है तो इन फसलो की कटाई से कुछ दिन पहले खेत की हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए, जिससे धान अथवा गन्ने के कटाई के बाद खेत की एक बार मिटटी पलट हल से जुताई करने के बाद 3-4 सामान्य जुताई करके गेहूँ की फसल को बोया जा सके| जुताई के बाद पहले खेत को एक बराबर बना ले और ये निश्चित कर लें कि खेत में किसी प्रकार के किट तो नही, अगर खेत में किसी प्रकार का किट है तो आखिरी जुताई के साथ खेत में कुछ कीटनाशकों का प्रयोग करना सही रहेगा|

बोआई का समय 

गेहूँ की बुआई सामान्यतः अक्टूबर से लेकर दिसंबर महीने तक चलती है लेकिन गेहू के किस्म पर निर्भर करता है कि गेहूँ की बुआई अगेती करनी है या नही| अगर गेहूँ का किस्म अगेती है तो गेहूँ की बुआई में देर नही करनी चाहिए, नही तो आपको उपज में भारी नुकसान हो सकता है| उपज में लगभग 2-3 क्विंटल प्रति सप्ताह के दर से देरी के हिसाब से घटती है|

बिज की मात्र

अगर गेहूँ की अगेती बुआई कर रहें है तो 100किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बिज पर्याप्त है और अगर बुआई देरी से कर रहें है तो आपको बिज की मात्रा बढ़ा कर 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर कर देनी चाहिए और जैसा की हमने पहले जाना कि गेहूँ की बुआई के समय खेत में हलकी नमी होनी चाहिए और बिज को ज्यादा अन्दर नही बोना चाहिए|

सिंचाई

गेहूँ की सिंचाई कितनी की जाये ये भूमी की प्रकार और वर्षा पर निर्भर करती है लेकिन सामान्यतः गेंहू की पहली सिंचाई गेहूँ के पौधों के निकल जाने पर करनी चाहिए, गेहूँ के पौधे 20-25दिनों में निकल जाते है तो 20-25दिनो बाद गेहूँ की पहली सिंचाई करनी चाहिए और दूसरी सिंचाई 40-45दिनों बाद करनी चाहिए , गेहूँ की तीसरी सिंचाई 70-75दिनों बाद करनी चाहिए और गेहूँ की आखिरी और चौथी सिंचाई 115-120 दिन बाद करनी चाहिए अगर भूमि रेतीली है तो 1-2 अधिक सिंचाई की जरूरत हो सकती है| सिंचाई के समय ये बात ध्यान रखना चाहिए की हवा तेज ना चल रहीं हो , नही तो फसल के गिराने की सम्भावना होती है|

खरपतवार पर नियंत्रण

गेहूँ में खर पतवार पर नियंत्रण करने के लिए खरपतवार नाशक दवाओं का छिडकाव करें|

कटाई का सही समय

गेहूँ की फसल की कटाई फसल पूरी तरह पकने से थोड़े समय पहले ही कर लेनी चाहिए और फिर फसल को धुप में अच्छे से सुखह लेना चाहिए, क्युकी अगर गेहूँ की कटाई फसल पूरी तरह से पकाने के बाद करेंगे तो गेहूँ के डाले झड़ने लगते है और फसल का नुकसान होता है|

उम्मीद है आपको समझ आ गया होगा, अगर आपको कोई और परेशानी है तो आप निचे पूछ सकते है| हमे अपने किसान भाइयों की मदद करके ख़ुशी होगी|


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